Vaidyanath Jyotirlinga: वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग क्यों कहलाता है 'कामना लिंग', पूजा से दूर होते हैं हर रोग-दोष

Sep 09, 2025
Astro Panchang
झारखंड के देवघर में भगवान शिव का पवित्र और भव्य मंदिर स्थित है। हर साल सावन के महीने में यहां पर श्रावण मेला लगता है। इस दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। वहीं सुल्तानगंज से पवित्र गंगा का जल लेकर श्रद्धालु करीब 100 किमी तक कांवड़ उठाकर भोलेबाबा को जल चढ़ाते हैं। इस दौरान यहां की आध्यात्मिक आभा देखने लायक होती है। बता दें कि इस मंदिर की कहानी रामायण काल से जुड़ी है। तो आइए जानते हैं भोलेनाथ को समर्पित इस फेमस मंदिर के बारे में...
लंका में होता यह ज्योतिर्लिंग
पौराणिक कथाओं के मुताबिक रावण ने हिमालय पर जातक भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या की थी। जिसके बाद उसने एक-एक करके अपने 9 सिर काटकर शिवलिंग पर अर्पित कर दिए। जब रावण अपना आखिरी सिर काटने वाला था, तो भगवान शिव ने उससे प्रसन्न होकर वरदान मांगने के लिए कहा।
तब रावण ने शिवलिंग को लंका में स्थापित करने की आज्ञा मांगी। भगवान शिव ने उसको लिंग देकर कहा कि इसको जहां भी रख दिया जाएगा, यह शिवलिंग वहीं स्थापित हो जाएगा। यह जानकर सभी देवता परेशान हो गए। क्योंकि रावण पहले से ही काफी ज्यादा शक्तिशाली था।
अगर रावण वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग को लंका ले जाकर स्थापित कर लेता तो उसकी शक्ति अधिक बढ़ जाती। वहीं रावण अपने घमंड और अभिमान में देवताओं के लिए खतरा बन जाता और दुनिया में अशांति और अराजकता का माहौल बना सकता है।