Ujjain Mahakal Darshan Benefits: क्यों Ujjain है पृथ्वी का केंद्र, Mahakal Temple से तय होता है दुनिया का Time, जानें बड़ा रहस्य

Feb 20, 2026
Astro Panchang
'अकाल मृत्यु वह मरे, जो काम करे चांडाल का, काल भी उसका क्या बिगाड़े जो भक्त हो महाकाल का।' काल यानी समय और काल यानी मृत्यु। समय और मृत्यु दोनों ही जिसके आगे नतमस्तक हो जाती हैं, उनको उज्जैन के महाकाल के नाम से जाना जाता है। भगवान महाकाल के दर्शन करने से व्यक्ति का सोया हुआ भाग्य खुल जाता है। उज्जैन का महाकाल मंदिर एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है, जो दक्षिण दिशा की ओर मुख किए हुए हैं। माना जाता है कि दक्षिण दिशा मृत्यु के देवता यमराज की दिशा है। भगवान महाकाल मृत्यु से परे होने की वजह से इस दिशा में विराजमान हैं।
स्वयंभू शिवलिंग
वहीं, उज्जैन के महाकालेश्वर शिवलिंग को स्वयंभू माना जाता है, जिसका अर्थ है कि यह स्वयं प्रकट हुआ है। मान्यता है कि भगवान शिव ने एक राक्षस दूषण को भस्म कर उसी की राख से अपना श्रृंगार किया था। समय के अंत तक इसी स्थान पर रहने के कारण वह 'महाकाल' कहलाए।
मानक समय रेखा
उज्जैन महाकाल 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह इस मंदिर में शिवलिंग की स्थापना किसी व्यक्ति ने नहीं की है। यहां पर भगवान महाकाल एक ज्योति के रूप में स्वयं स्थापित हुए हैं। उज्जैन को पृथ्वी की नाभि भी कहा जाता है। प्राचीन काल में उज्जैन गणित और विज्ञान की रिसर्च केंद्र हुआ करता था। जिसकी वजह यह है कि दुनियाभर में मानक समय की गणना करने वाली कर्क रेखा इस स्थान से होकर गुजरती है।
पुराणों में वर्णन
बता दें कि स्कंदपुराण के अवंती खंड में भगवान महाकाल का विवरण मिलता है। पुराणों में भी महाकाल मंदिर का उल्लेख किया गया है। वहीं कालिदास ने मेघदूतम के पहले भाग में महाकाल मंदिर का उल्लेख मिलता है। शिवपुराण के मुताबिक नंद से आठ पीढ़ी पहले एक गोप नामक बालक ने महाकाल की प्राण-प्रतिष्ठा की थी।