Astrology Tips: जानें क्यों काले मोतियों के बिना अधूरा है सुहाग का प्रतीक, क्या है Science

Jun 05, 2026
Astro Panchang
हिंदू धर्म में विवाह को सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं बल्कि दो आत्माओं का पवित्र बंधन भी माना जाता है। इस पवित्र बंधन का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक मंगलसूत्र है। कुछ लोग इसको सिर्फ सोने और काले मोतियों से बना एक आभूषण मानते हैं। लेकिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से मंगलसूत्र को एक शक्तिशाली रक्षा कवच है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि मंगलसूत्र में काले मोती क्यों डाले जाते हैं और इसका धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व क्या है।
शिव और शक्ति का प्रतीक
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक मंगलसूत्र का हर हिस्सा ब्रह्मांड की दिव्य शक्तियों को दिखाता है। मंगलसूत्र में मौजूद सोने का हिस्सा मां पार्वती यानी की शक्ति का प्रतीक है। वहीं इसमें पिरोए हुए काले मोती भगवान शिव का प्रतिनिधित्व करते हैं।
सोना तेज और समृद्धि का कारक माना जाता है। तो काले मोतियों को धैर्य, सुरक्षा और वैराग्य का प्रतीक है। जब यह दोनों एक सूत्र में पिरोए जाते हैं, तो यह शिव शक्ति के मिलन को दिखाते हैं। यही कारण है कि काले मोतियों के बिना मंगलसूत्र अधूरा माना जाता है। क्योंकि इसके बिना शिव-शक्ति का संतुलन स्थापित नहीं हो पाता है।
लंबी उम्र और सकारात्मक ऊर्जा
आध्यात्मिक दृष्टि से जब विवाहित महिला मंगलसूत्र धारण करती है, तो काले मोती महिला के मन को शांत रखते हैं और पॉजिटिव ऊर्जा का संचार करते हैं। वहीं शास्त्रों में मान्यता है कि पत्नी के गले में मौजूद काले मोती पति के जीवन के संकटों को टालते हैं। क्योंकि मंगलसूत्र सिर्फ आभूषण नहीं बल्कि पति की लंबी आयु और तरक्की के लिए की जाने वाली प्रार्थना है।