Sawan Special: कांवड़ यात्रा और शिव भक्ति में क्यों अनिवार्य है ‘हर हर महादेव’ का पावन जयघोष

Aug 04, 2026
Astro Panchang
सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही चारों ओर शिव भक्तों की गूंज सुनाई देने लगती है। मंदिरों में जल चढ़ाते शिवभक्त हों या फिर कांवड़ यात्रा पर निकले कांवड़िए। हर किसी की जुबान पर सिर्फ एक ही नाम 'हर हर महादेव' होता है। इस जयघोष के बिना यह पर्व अधूरा माना जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह जयघोष लोग क्यों करते हैं और इसकी शुरूआत कहां से हुई है।
पहली बार 'हर-हर महादेव' का उत्घोष
पौराणिक कथाओं के मुताबिक जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ था, तो उसमें से बेहद विषैला हलाहल विष निकला था। इस विष की तपन से पूरी सृष्टि जलने लगी थी। संसार की रक्षा के लिए भगवान शंकर ने उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया था। भगवान शिव के इस त्याग से प्रसन्न होकर सभी ऋषियों-मुनियों और देवताओं ने आभार व्यक्त करने के लिए पहली बार 'हर हर महादेव' का जयघोष किया था।
इस जयघोष का अर्थ
'हर हर महादेव' सिर्फ एक जयकारा नहीं बल्कि भगवान शिव से जुड़ी अटूट श्रद्धा और विश्वाक का प्रतीक है। जब-जब देवताओं पर कोई संकट आया था, या फिर कोई महान असुर सृष्टि पर अत्याचार करने लगा, तो लोगों ने मदद के लिए भगवान शिव का आह्वान किया। भोलेनाथ ने हमेशा आगे आकर अपने सभी भक्तों के सभी कष्टों और पापों का हरण किया था। यही वजह है कि संकट या परेशानी के समय शिव को याद करते हुए भक्त 'हर हर महादेव' का जयघोष करने लगे।
जयघोष करने से मिलती है ताकत
सावन के महीने में जब कांवड़िए पवित्र नदियों से जल भरकर पैदल शिवधाम की तरफ बढ़ते हैं, तो 'हर हर महादेव' का जयघोष करते हैं। सैकड़ों किमी की थकान भरे सफर में यह मंत्र भक्तों के अंदर एक नई ऊर्जा, भक्ति और जोश का संचार करता है। माना जाता है कि इस जयघोष के उच्चारण मात्र से मन की घबराहट और शरीर की शारीरिक थकान मिट जाती है। इस कारण से सावन का पवित्र महीना इस पावन जयकारे के बिना अधूरा माना जाता है।