Rahu Ketu Temples: क्यों अशुभ हैं Rahu-Ketu? जानिए उन 6 मंदिरों के बारे में जहां मिलता है दोषों से छुटकारा

Jun 13, 2026
Astro Panchang
ज्योतिष शास्त्र में राहु और केतु को भी उतना ही महत्वपूर्ण ग्रह हैं, जिनके की अन्य ग्रह हैं। राहु-केतु ग्रह को छाया ग्रह माना जाता है और इनको जीवन में अचानक होने वाले बदलाव, भ्रम और कर्मों के सबक के लिए जिम्मेदार माना जाता है। वहीं इन दोनों ग्रहों को आध्यात्मिक विकास और आत्म साक्षात्कार की तरफ बढ़ने वाली शक्तिशाली ताकतों के रूप में भी पूजा जाता है। देशभर में राहु-केतु से जुड़े 6 ऐसे मंदिर हैं, जहां पर भक्त इन स्थानों पर आकर अपने ग्रहीय प्रभावों को कम करने के लिए धार्मिक अनुष्ठानों का भी आयोजन करते हैं।
श्री कालहस्तीश्वर मंदिर
आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले में श्रीकालहस्तीश्वर में स्थित है। यह मंदिर देश के सबसे पूजनीय शैव तीर्थों में शामिल है। यहां पर भगवान शंकर को कालहस्तीश्वर के रूप में पूजा जाता है। जोकि वायु का प्रतिनिधित्व करते हैं।
इस मंदिर को राहु-केतु क्षेत्र के रूप में भी जाना जाता है। जिस कारण से स्थानीय इसको दक्षिण कैलाशम भी कहते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने से राहु-केतु से जुड़े दोष कम होते हैं।
तिरुनागेश्वरम नागनाथर मंदिर
तिरुनागेश्वर नागनाथर मंदिर तमिलनाडु में स्थित है। इसको राहु स्थलम के नाम से भी जाना जाता है। तिरुनागेश्वरम नागनाथर मंदिर तमिलनाडु के कुंभकोणम के नजदीक एक पूजनीय शिव मंदिर है। स्थानीय लोग यहां पर भगवान शिव को नागनाथ और मां पार्वती को पिरैसूदी अम्मन के रूप में पूजते हैं।