जानें क्या है सर्वपितृ अमावस्या? इस दिन श्राद्ध करने से मिलता है पूरे पितृपक्ष का फल

Sep 22, 2021
हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन कृष्ण पक्ष से लेकर अमवस्या तक का समय पितृपक्ष कहलाता है। इस साल पितृ पक्ष 20 सितम्बर 2021 से 06 अक्टूबर 2021 तक है। हिन्दू धर्म के अनुसार पितृ पक्ष में पितरों की आत्मा की शांति के लिए उनका श्राद्ध करना बहुत जरूरी माना गया है। मान्यताओं के अनुसार यदि किसी मृत व्यक्ति का श्राद्ध ना किया जाए तो उसकी आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती है। हिन्दू पंचांग के अनुसार अश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है। इसे महालया या मोक्षदायनी अमावस्या भी कहा जाता है। यह पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है। इस बार सर्वपितृ अमावस्या 6 अक्टूबर 2021 को है। शास्त्रों के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितृ धरती लोक से विदा लेते हैं और इस दिन पिंडदान और तर्पण करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। आज के इस लेख में हम आपको सर्वपितृ अमावस्या के महत्व और इस दिन श्राद्ध करने की विधि के बारे में बताएंगे -
सर्व पितृ अमावस्या का महत्व
हिन्दू धर्म में पितृ पक्ष की अमावस्या यानी सर्व पिृत अमावस्या का विशेष महत्त्व है। शास्त्रों के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितरों का श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण करने से विशेष फल प्राप्त होता है और पितृदोष से मुक्ति मिलती है। सर्वपितृ अमावस्या के बारे में यह मान्यता भी है कि यदि पितृपक्ष में श्राद्ध तिथि वाले दिन श्राद्ध ना कर पाए हों तो सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितरों का श्राद्ध-तर्पण करने से बीते 14 दिनों का पुण्य प्राप्त होता है। इसके साथ ही जिन पितरों की मृत्यु तिथि के बारे में ना पता हो उनका श्राद्ध भी सर्वपितृ अमावस्या के दिन कर सकते हैं। शास्त्रों के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितरों का श्राद्ध-तर्पण करने से वे खुशी-खुशी विदा होते हैं और आशीर्वाद देते हैं। इस दिन श्राद्ध करने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और उनकी आत्मा को शांति मिलती है। इस दिन पितरों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है और ब्राह्मणों को भोजन करवाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या के दिन ब्राह्मणों और गरीबों को दान-दक्षिणा देने से और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
सर्व पितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध करने की विधि
सर्व पितृ अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें। श्राद्ध करते समय सफेद वस्त्र ही धारण करें।
अब गायत्री मंत्र का जाप करते हुए सूर्य देव को जल अर्पित करें।