Vaishno Devi Trip: जम्मू-कटरा जाने का है Plan? अब बेहद आसान हुई यात्रा, जानिए पूरी प्रक्रिया

May 04, 2026
Astro Panchang
अगर आप भी पहली बार वैष्णों देवी की यात्रा पर जा रहे हैं। तो इस यात्रा से जुड़ी तमाम जानकारियां हासिल करके ही जाना चाहिए, जिससे कि यात्रा में कोई परेशानी न हो। हम आपको वैष्णों देवी यात्रा से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारियां देने जा रहे हैं। हिंदू धर्म को मानने वाले श्रद्धालुओं के मन में मां वैष्णों को लेकर एक अलग ही आस्था रहती है। इसको देश के सबसे पवित्र और कठिन तीर्थ यात्राओं में से एक माना जाता है। इसका कारण यह है कि वैष्णों देवी का दरबार जम्मू-कश्मीर स्थित त्रिकूट पर्वत पर एक गुफा है, जहां तक पहुंचने के लिए 13 किमी की मुश्किल चढ़ाई करनी पड़ती है।
पैदल या हेलिकॉप्टर
वैष्णों देवी तीर्थ स्थान समुद्र तल से 5 हजार 300 फीट की ऊंचाई पर है। बेस कैंप कटरा से माता वैष्णों देवी का दरबार जिसको भवन कहते हैं, वहां तक पहुंचने के लिए करीब 13 किमी की चढ़ाई करनी पड़ती है। मां के भवन तक पहुंचने के लिए पैदल चढ़ाई करना जरूरी नहीं है। आप चाहें तो पिट्ठू, पालकी, घोड़े या खच्चर की भी सवारी कर सकते हैं। जोकि आसानी से कटरा से मां के भवन तक मिल जाते हैं। वहीं कटरा से सांझी छत के बीच नियमित रूप से हेलिकॉप्टर सर्विस भी उपलब्ध रहती है। सांझी छत से सिर्फ ढांई किमी की पैदल यात्रा करनी पड़ती है।
यात्रा बनी आसान
मुश्किल भरी यात्रा के बाद भी करीब 1 करोड़ श्रद्धालु हर साल मां वैष्णों देवी के दर्शन के लिए आते हैं। यात्रा पूरा करने में कितना समय लगेगा, यह वहां के मौसम, आपकी स्पीड और भीड़ पर निर्भर करता है। वैसे तो पिछले कई सालों में वैष्णों देवी की यात्रा में कई सुविधाएं जुड़ गई हैं और यात्रा आसान हो गई है। पहाड़ों को काटकर प्लेन रास्ता बना दिया है। वहीं चढ़ाई के दौरान पूरे रास्ते में जगह-जगह शाकाहारी खाना, आराम करने के लिए शेड्स और पानी की व्यवस्था है, जोकि 24 घंटों चलती रहती है।
कब जाएं वैष्णो देवी
पूरे साल वैष्णों देवी यात्रा खुली रहती है। ऐसे में आप यहां कभी भी जा सकते हैं। लेकिन गर्मियों में मई से जून और नवरात्रि के बीच पीक सीजन होने से भक्तों की जबरदस्त भीड़ देखने को मिलती है। वहीं बारिश के मौसम में यात्रा करने से बचना चाहिए। इसके अलावा दिसंबर से जनवरी के बीच यहां काफी ज्यादा ठंड रहती है।