Ganga के समान महत्व पाने के लिए की थी तपस्या, जानिए कैसे Narmada River बन गई मोक्षदायिनी

Aug 24, 2026
Astro Panchang
भारत की कुछ नदियों को बेहद पवित्र माना जाता है। इन नदियों का उल्लेख किसी देवी की तरह धार्मिक शास्त्रों और पुराणों में मिलता है। नर्मदा नदी को भी उन्हीं नदियों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि नर्मदा का हर कंकड़ भोलेनाथ का स्वरूप होता है। इसलिए यहां पर मिलने वाले प्राकृतिक शिवलिंगों को 'नर्मदेश्वर शिवलिंग' कहा जाता है।
देशभर में इन शिवलिंगों की पूजा मंदिरों और घरों में की जाती है। इसके अलावा इसके पीछे एक बेहद रोचक पौराणिक कथा है। जिसका उल्लेख 'स्कंद पुराण', 'वायु पुराण' के रेवा खंड, 'नर्मदा माहात्म्य' और 'मत्स्य पुराण' में मिलता है।
नर्मदा ने किया था कठोर तप
पौराणिक कथा के मुताबिक, मां नर्मदा ने कई सालों तक कठोर तपस्या की है। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ब्रह्माजी प्रकट हुए और उनसे वरदान मांगने को कहा। देवी नर्मदा ने कहा, 'मुझे मां गंगा नदी की लोकप्रिय होना है।' मैं चाहती हूं कि दुनियाभर में मुझे भी गंगा की तरह की महान समझा जाए और नर्मदा जी की पूजा की जाए। भगवान शिव देवी नर्मदा को अपनी जटाओं में स्थान दें।
मां नर्मदा की बात सुनकर ब्रह्माजी मुस्कुराए और कहा, 'जिस दिन कोई दूसरा देवता भोलेनाथ के समान हो जाएगा।' कोई दूसरा पुरुष भगवान विष्णु की बराबरी कर लेगा, कोई दूसरी स्त्री देवी पार्वती के समान होगी और कोई दूसरी नगरी काशी के बराबर मोक्षदायिनी हो जाएगी। उस दिन कोई दूसरी नदी भी गंगा के समान हो सकती है।