Kedarnath Mystery: Mahabharat से जुड़ा है Kedarnath का रहस्य, जानें क्यों यहां त्रिकोण रूप में पूजे जाते हैं Lord Shiva

Jun 02, 2026
Astro Panchang
शिव पुराण में 12 ज्योतिर्लिंग का उल्लेख मिलता है, जिनको द्वादश ज्योतिर्लिंग के नाम से जाना जाता है। भगवान शिव को समर्पित ज्योतिर्लिंग देश के अलग-अलग जगहों पर स्थापित हैं। ज्योतिर्लिंगों को भगवान शिव की शक्ति का केंद्र माना जाता है। वहीं 12 ज्योतिर्लिंगों में केदारनाथ भी शामिल है। केदारनाथ मंदिर में स्थापित शिवलिंग का आध्यात्मिक महत्व बेहद अनोखा है। केदारनाथ मंदिर में शिवलिंग त्रिकोणीय आकार का है। यह एक विशाल चट्टान का हिस्सा है, जिसको स्वयंभू माना जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि केदारनाथ का शिवलिंग त्रिभुजाकार क्यों है।
त्रिभुजाकार शिवलिंग
पौराणिक कथा के मुताबिक महाभारत के युद्ध के बाद पांडवों को अपने कुल के लोगों की हत्या करने के बाद पछतावा हुआ। पांडव मृत्यु के पाप से छुटकारा पाना चाहते थे। इसलिए पांडव भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते थे, लेकिन भगवान शिव पांडवों से नाराज थे, जिस कारण उनको दर्शन नहीं देना चाहते थे। पांडवों से भगवान शिव रुष्ट थे, इसलिए पांडवों से बचने के लिए महादेव ने बैल का रूप धारण किया। लेकिन भीम बेहद शक्तिशाली थे। भीम ने भगवान शिव को पहचान लिया।
जब महादेव भीम से बचने के लिए धरती में समाने लगे, तो भीम ने शिव को पकड़ने की कोशिश की। बैल का पूरा हिस्सा धरती में धस गया, लेकिन पीठ का हिस्सा वहीं रह गया, आज वही त्रिकोणीय शिवलिंग भगवान शिव के रूप में पूजा जाता है।
केदारनाथ मंदिर विशाल पठार के बीच में बना है। 8वीं शताब्दी में जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने केदारनाथ मंदिर का निर्माण कराया था। वहीं मंदिर के मुख्य द्वार पर नंदी बैल की एक विशाल प्रतिमा मौजूद है, इस मंदिर का शिवलिंग त्रिदेवों का प्रतीक माना जाता है।