Kamakhya Temple History: असम के इस मंदिर में देवी मां को होता है रजस्वला, जानिए पौराणिक कहानी

Oct 19, 2023
Astro Panchang
असम के एक मंदिर में माता रानी की योनि की पूजा होती है। इसके अलावा यहां पर प्रसाद के रूप में खून की रुई बांटी जाती है। इस रूई को लेने के लिए लाखों भक्तों की भीड़ जमा होती है। असम में मां कामाख्या देवी का मंदिर अपनी महानताओं के लिए प्रचलित हैं। यहां पर माता के दर्शन के लिए और उनके प्रसाद को लेने को लिए कई भक्त विदेशों से भी आते हैं। इस मंदिर के बारे में ऐसा माना जाता है कि कामाख्या मंदिर में जो भी भक्त मां की योनि के दर्शन करता है और उसके सभी कष्ट मिट जाते हैं। साथ ही मां अपने भक्तों की हर इच्छा को पूरी करतीं हैं। आइए जानते हैं मां कामाख्या मंदिर की कहानी और उनके कुछ रहस्यों के बारे में...
इतने दिन तक मां करतीं हैं आराम
मां कामाख्या 3 दिन तक आराम करती हैं। एक तरफ जहां मासिक धर्म के दौरान महिलाएं आराम तक नहीं कर पाती हैं, वहीं असम के इस मंदिर की परम्परा एकदम विपरीत है। मासिक धर्म के चलते मां कामाख्या देवी को 3 दिनों का आराम दिया जाता है। इनको 'बहते रक्त की देवी' के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि मां कामाख्या देवी का एक ऐसा स्वरूप भी है, जो नियम के अनुसार हर वर्ष धर्म के चक्र में आता है। यहां के लोगों के अनुसार प्रतिवर्ष जून के महीने में कामाख्या देवी को मासिक धर्म होता है। उनकी योनि से रक्त निकलता है और उनके बहते खून से ब्रह्मपुत्र नदी का रंग लाल हो जाता है।
यह दिया जाता है प्रसाद
जब माता को जून के महीन में पीरियड्स होता है तब मंदिर को 3 दिनों के लिए बंद कर दिया जाता है। लेकिन उस मंदिर के पास में ही 'अम्बूवाची पर्व' मनाया जाता है। इस पर्व को मेले के रूप में मनाया जाता है। इस दौरान मेले में सैलानियों के साथ-साथ साधू-संत, तांत्रिक, पुजारी आदि भक्त लोग आते हैं। इसी समय पर्वत की अलग-अलग गुफाओं में बैठकर साधु और पुजारी शक्ति प्राप्त करने के लिए साधना करते हैं। मां कामाख्या देवी के इस मंदिर में देश-विदेश से लोग मासिक धर्म के खून से लिपटी हुई रूई के प्रसाद को लेने के लिए आते हैं और लम्बी लाइन में लगकर मां के प्रसाद को प्राप्त करते हैं।