Ekadashi Vrat: सभी पापों से मिलती है मुक्ति, जानें Utpanna Ekadashi की शुरुआत और इसका Ultimate Benefit

Jun 08, 2026
Astro Panchang
सनातन धर्म में सभी व्रतों में एकादशी व्रत का बड़ा महत्व बताया जाता है। साल में पूरी 24 एकादशी आती है। जिनमें देव प्रबोधनी, देवशयनी और मार्गशीर्ष माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का बड़ा महत्व होता है। इस एकादशी को उत्पन्ना एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि उत्पन्ना एकादशी से ही एकादशी व्रत की शुरूआत हुई थी। क्योंकि सतयुग में इसी एकादशी तिथि को जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु के शरीर से देवी का जन्म हुआ था। इसी देवी ने भगवान विष्णु के प्राण बचाए और जिससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने इनको एकादशी का नाम दिया था।
धार्मिक शास्त्रों के मुताबिक जो भी व्यक्ति उत्पन्ना एकादशी के दिन पर व्रत करता है, भगवान विष्णु संग देवी एकादशी की पूजा करता है। तो उसके कई जन्मों के पाप कट जाते हैं। वहीं व्यक्ति उत्तम लोग में स्थान पाने का अधिकारी बन जाता है।
उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा
मुर नामक असुर से युद्ध करते हुए जब श्रीविष्णु थक गए, तो वह बद्रीकाश्रम में गुफा में जाकर विश्राम करने लगे। लेकिन मुर असुर श्रीहरि विष्णु का पीछा करते हुए बद्रीकाश्रम पहुंच गया। वहां पर निद्रा में लीन विष्णु को जब मुर ने लात मारना चाहा, तो श्रीहरि विष्णु के शरीर से एक देवी का जन्म हुआ और उन देवी ने मुर का वध कर दिया।
देवी के कार्य से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने कहा कि हे देवी ! तुम्हारा जन्म मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को हुआ है। इस कारण तुम्हारा नाम एकादशी होगा। वहीं आज से एकादशी को मेरे साथ तुम्हारी भी पूजा होगी। वहीं जो भी व्यक्ति एकादशी का व्रत करेगा, वह सभी पापों से मुक्त हो जाएगा।