Radha Krishna Mythology: जानिए कैसे गोलोक की दिव्य स्वरूपा ने कीर्ति-वृषभानु के घर लिया जन्म

Aug 27, 2026
Astro Panchang
राधा रानी को प्रेम की देवी कहा जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन की धारा, राधा जी हैं। माना जाता है कि गोलोक में एक बार श्रीकृष्ण रास करने की इच्छा में लीन थे। तब भगवान श्रीकृष्ण के बाएं भाग से दिव्य स्वरूपा श्रीराधा प्रकट हुई थीं। भगवान श्रीकृष्ण ने धरा पर अधर्म का नाश करने के लिए पृथ्वी पर अवतार लिया था। लेकिन माना जाता है कि बिना श्रीराधा के वासुदेव कृष्ण के ध्येय को दिशा नहीं मिल सकती थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि श्रीराधा रानी एक श्राप की वजह से श्रीकृष्ण से पहले धरती पर जन्मी थीं।
पतिव्रता नारी थीं श्रीराधा
राधा रानी के बिना श्रीकृष्ण की आराधना अधूरी मानी जाती है। भले ही राधा और कृष्ण ने संग में अधिक समय नहीं बिताया हो। लेकिन दोनों एक-दूसरे के दिल में हमेशा बसे रहे। राधा रानी एक पतिव्रता नारी थीं वह अपने पति आयन के प्रति पूरी तरह समर्पित रहीं। हालांकि श्रीकृष्ण के प्रति राधा रानी का प्रेम सात्विक और निश्छल था।
बरसाना की महारानी
बरसाना राधा रानी की जन्मभूमि रही है। स्कंद पुराण के मुताबिक राधा और कृष्ण की आत्मा एक है। इसी कारण उनको 'राधारमण' कहकर पुकारते हैं। पद्म पुराण में 'परमानंद' रस को श्रीराधा-कृष्ण का युगल स्वरूप माना गया है। राधा-कृष्ण की पूजा किए बगैर जीव परमानंद को प्राप्त नहीं कर सकता है। भविष्य पुराण और गर्ग संहिता के मुताबिक द्वापर युग में श्रीकृष्ण पृथ्वी पर अवतरित हुए थे।
वहीं महाराज वृषभानु की पत्नी कीर्ति के यहां भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन भगवती राधा अवतरित हुई। जिसके बाद भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि राधाष्टमी नाम से प्रसिद्ध हुईं। राधा और कृष्ण को पद्म पुराण में 'युगल सरकार' की संज्ञा दी गई है। शिव पुराण में भगवान श्रीकृष्ण के परम मित्र से भिन्न सुदामा गोप द्वारा राधा रानी को श्राप दिए जाने का उल्लेख मिलता है।