Rules of Offering Bhog: भगवान के पास कितनी देर रखें भोग, ये गलती पड़ सकती है भारी, जानें सही समय

Oct 06, 2025
Astro Panchang
हिंदू धर्म में किसी भी पूजा-पाठ या फिर अनुष्ठान के बाद भगवान को भोग लगाने की परंपरा है। हम सभी सदियों से इसका पालन करते आ रहे हैं। पूजा की समाप्ति के बाद ईश्वर को भोग अर्पित किया जाता है। फिर थोड़ी देर बाद यह भोग भक्तजनों में वितरित कर दिया जाता है। यह भोग भोजन या फिर मिष्ठान नहीं होता है। बल्कि यह हमारी श्रद्धा, आस्था और प्रेम से भरी एक भेंट होती है, जोकि हम ईश्वर को श्रद्धाभाव से और अपने सामर्थ्य के मुताबिक अर्पित करते हैं।
भोग लगाने के दौरान अक्सर हमारे मन में एक साल आता है कि ईश्वर के सामने भोग को कितनी देर तक रखना ठीक होता है। लेकिन क्या फौरन भोग उठा लेना चाहिए। इसको 5-10 मिनट या फिर ईश्वर के सामने ही रखा रहने देना चाहिए। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि ईश्वर को भोग क्यों लगाया जाता है और भगवान को कैसे भोग लगाना चाहिए।
क्यों लगाया जाता है ईश्वर को भोग
हिंदू धर्म में भोग लगाना पूजा का एक जरूरी हिस्सा माना गया है। मान्यता है कि यह भगवान को प्रसन्न करने के लिए पहले उनको भोग लगाया जाता है। इस भोग को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। संस्कृत में इसको 'नैवेद्य' कहा जाता है। जिसका अर्थ है 'प्रस्तुति' या 'अर्पण' है, जोकि हम ईश्वर को अर्पित करते हैं। भोग में अर्पित किया जाने वाला भोग पूरी श्रद्धा और सात्विकता के साथ बनाया जाता है। इसको बिना चखे सबसे पहले भगवान को अर्पित किया जाता है।
कैसे लगाएं भगवान को भोग
अगर आप नियमित रूप से भगवान को भोग लगाती हैं, तो आपको हमेशा ऐसे बर्तन में भोग लगाना चाहिए, जिसका आप स्वयं घर में इस्तेमाल न करती हों। हमेशा साफ़-सुथरे बर्तनों में ही भोग लगाना चाहिए। भोग के लिए पीतल या चांदी के बर्तन शुभ माना जाता है। कभी भी लोहे या फिर स्टील के बर्तन में भोग नहीं लगाना चाहिए। भगवान को भोग लगाते समय कभी थाली को सीधे जमीन पर नहीं रखना चाहिए।