Maa Kamakhya Temple: Guwahati के Kamakhya Temple जा रहे हैं, इस चमत्कारी Mantra के जाप से कभी खाली नहीं जाएगी झोली

Mar 13, 2026
Astro Panchang
असम के गुवाहाटी में स्थित कामाख्या मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां पर रोजाना बड़ी संख्या में भक्त दर्शन और पूजन के लिए आते हैं। माना जाता है कि भक्त यहां आकर जो भी कामना करते हैं, वह जरूर पूरी होती है। इसलिए कामाख्या मंदिर में जब भी आप दर्शन करने के लिए आएं, तो पूजा के साथ मंत्र जाप भी करना चाहिए। ऐसे में अगर आप भी कामाख्या मंदिर के दर्शन करने की योजना बना रहे हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए है। आज हम आपको कामाख्या मंदिर की खासियत, महत्व और मंत्र आदि के बारे में बताने जा रहे हैं।
मंदिर का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक जब भोलेनाथ अपनी पत्नी सती के शव को लेकर ब्रह्मांड में विलाप करते हुए घूम रहे थे। तब श्रीहरि विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े कर दिए थे। जहां-जहां पर मां सती के अंग गिरे, वहां-वहां पर शक्तिपीठों की स्थापना हुई। माना जाता है कि कामाख्या पर्वत पर देवी सती का योनिभाग गिरा था। इसी वजह से मंदिर शक्ति और सृजन का प्रतीक माना जाता है।
कामाख्या मंदिर का इतिहास
माना जाता है कि कामदेव ने इस मंदिर का निर्माण विश्वकर्मा की मदद से करवाया था। यह मंदिर अभी की तुलना में काफी बड़ा हुआ करता था। कहा जाता है कि इस मंदिर की वास्तुकला इतनी ज्यादा खूबसूरत थी कि इसकी तुलना नहीं की जा सकती है। कामाख्या मंदिर का इतिहास कई किवदंतियों से मिला-जुला है। ऐसा भी कहा जाता है कि कामाख्या मंदिर का निर्माण आर्यों से पहले हुआ था।
फिर जैसे-जैसे शैव अनुयायियों की संख्या बढ़ी, कामाख्या मंदिर का महत्व कम होता गया। इस मंदिर की महत्ता राजा नरका के राज में दोबारा स्थापित हुई। लेकिन 16वीं शताब्दी से पहले कामाख्या मंदिर का इतिहास काफी अस्पष्ट है।