Jagannath Rath Yatra 2026: पुनर्जन्म से मुक्ति का द्वार है Gundicha Mandir, जानें Puri का यह Divine रहस्य

Jun 24, 2026
Astro Panchang
ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए हर साल लाखों भक्त पहुंचते हैं। मान्यता है कि जगन्नाथ धाम के दर्शन करने मात्र से जातक को उनकी कृपा प्राप्त होती है। वहीं ओडिशा के पुरी में सिर्फ जगन्नाथ मंदिर ही नहीं बल्कि गुंडिचा मंदिर भी है। यहां पर भगवान जगन्नाथ विश्राम के लिए आते हैं, इसको उनकी मौसी का घर भी कहा जाता है। गुंडिचा मंदिर जगन्नाथ धाम से करीब 3 किमी दूर स्थित है।
हर साल भव्य और विशाल रथ यात्रा के दौरान गुंडिचा मंदिर सबसे अहम पड़ाव माना जाता है। इस बार 16 जुलाई 2026 से जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरूआत होगी। मान्यता है कि रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन मात्र से ही व्यक्ति को जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है।
गुंडिचा मंदिर क्यों है खास
हिंदू परंपराओं के अनुसार, रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य रथों पर सवार होकर अपनी मौसी यानी की गुंडिचा मंदिर जाते हैं। इस दौरान भगवान यहां पर 7 दिनों तक रुककर विश्राम करते हैं। इस कारण पुरी के सबसे खास मंदिरों में गुंडिचा मंदिर शामिल है। हर श्रद्धालु जगन्नाथ भगवान के दर्शन करने के बाद गुंडिचा मंदिर जरूर आते हैं।
आध्यात्मिक महत्व
धार्मिक आस्था के अनुसार, भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान गुंडिचा मंदिर के दर्शन करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। वहीं कई पौराणिक और स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक जो भी भक्त पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ भगवान के रथ के दर्शन करता है या फिर रस्सी खींचता है। वह व्यक्ति पुनर्जन्म के बंधन से मुक्त हो जाता है।