Saraswati Puja 2026: सरस्वती पूजा पर इस तरह से करें मां सरस्वती की आराधना, इन चीजों को पूजा में करें शामिल

Saraswati Puja 2026: सरस्वती पूजा पर इस तरह से करें मां सरस्वती की आराधना, इन चीजों को पूजा में करें शामिल

हिंदू धर्म में मां सरस्वती को बुद्धि, ज्ञान, वाणी और कला की अधिष्ठात्री देवी हैं। हर साल छात्र, शिक्षक और कला-संगीत से जुड़े लोग मां सरस्वती की कृपा पाने के लिए विशेष अनुष्ठान करते हैं। वैदिक पंचांग के मुताबिक साल में मुख्य रूप से दो बार सरस्वती पूजा का विधान मिलता है। पहला माघ शुक्ल पंचमी यानी की बसंत पंचमी और दूसरा आश्विन माह में शारदीय नवरात्रि के अंतिम दिनों में। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको मां सरस्वती की पूजा की सटीक तारीख, शुभ मुहूर्त और उन चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके बिना मां सरस्वती की पूजा अधूरी मानी जाती है।

तिथि और मुहूर्त

वैदिक पंचांग के मुताबिक 17 अक्टूबर 2026 को पूजा के लिए समय सबसे शुभ समय 06:22 बजे से दोपहर 12:06 बजे तक है। वहीं अभिजीत मुहूर्त 11:43 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक है। वहीं ज्योतिष के मुताबिक सुबह 07:00 बजे से 11:00 बजे तक का समय मां सरस्वती की चौकी सजाने और पूजा संपन्न करने के लिए शुभ माना जाता है।

पूजन सामग्री

हल्दी, कुमकुम, सिंदूर और रोली
अक्षत (अन्न के दाने)
लकड़ी की चौकी
आम के पत्ते
पीले फूल और फूलों की माला
पीला वस्त्र या चुनरी / साड़ी
कलश
पके हुए केले की फली और नारियल
भोग के लिए: मालपुआ, तिल के लड्डू, दूध या घी से बनी मिठाई
धूपबत्ती, इत्र और गुलाल
श्रृंगार का सामान

पूजन विधि

इस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद पूजा स्थल को साफ करें। फिर लकड़ी की चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाएं। इसके बाद चौकी पर मां सरस्वती की प्रतिमा को स्थापित करें। अब मां सरस्वती का आचमन करवाकर स्नान कराएं और फूल-माला अर्पित करें। इसके बाद फूल, माला और आम के पत्ते चढ़ाएं और फिर सिंदूर, अक्षत और श्रृंगार का सामान अर्पित करें। मां सरस्वती को पीला वस्त्र अर्पित करें और किताबें, कॉपी और कलम की पूजा करें।

फिर जरूरतमंदों को पढ़ाई का सामान दान करें और मां सरस्वती के साथ भगवान गणेश की पूजा करें। पूजा के बाद परिवार के सदस्यों को भोग या प्रसाद अर्पित करें। शाम को भी देवी सरस्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें।

महत्व

मां सरस्वती को विद्या और बुद्धि की देवी हैं। मां सरस्वती की पूजा करने से ध्यान और एकाग्रता बढ़ती है। पढ़ाई और परीक्षा में सफलता के लिए बेहद शुभ माना जाता है। बच्चों और स्टूडेंट्स के लिए अक्षरज्ञान और विद्यारंभ के लिए अच्छा मौका है। पूजा से सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ता है।

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