Ratneshwar Mahadev: श्रापित होने की वजह से हजारों साल से तिरछा खड़ा है वाराणसी का ये मंदिर, नहीं की जाती है कोई पूजा

May 26, 2023
Astro Panchang
भारत का सबसे पुराना शहर वाराणसी अपने धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए बेहद फेमस है। बता दें कि वाराणसी में हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। वैसे तो बनारस या वाराणसी में कई फेमस और पुराने मंदिर हैं। जिनका अपना महत्व व इतिहास है। लेकिन यहां के रत्नेश्वर मंदिर जैसा और कोई मंदिर मौजूद नहीं है। बता दें कि इस मंदिर की खासियत है कि यह कई सालों से तिरछा खड़ा हुआ है। इस मंदिर को देखकर इटली के पीसा टॉवर की याद आना स्वाभाविक है।
हालांकि इस मंदिर के बारे में काफी कम लोग जानते हैं। लेकिन यह ऐसा मंदिर है, जो पीसा से भी ज्यादा झुका हुआ और लंबा है। बता दें कि पीसा टॉवर करीब 4 डिग्री तक झुका हुआ है। लेकिन वाराणसी के मणिकर्णिका घाट के पास स्थित रत्नेश्वर मंदिर करीब 9 डिग्री झुका है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मंदिर 74 मीटर ऊंचा है। जो पीसा टॉवर से 20 मीटर अधिक है। रत्नेश्वर मंदिर सदियों पुराना ऐतिहासिक मंदिर है।
वाराणसी के मणिकर्णिका और सिंधिया घाट के बीच स्थित रत्नेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। बता दें कि इसको वाराणसी का झुका मंदिर, मातृ-रिन महादेव और काशी करवात के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर साल के अधिकतर समय में नदी में डूबा रहता है। कई बार पानी का स्तर इस मंदिर के शिखर तक भी पहुंच जाता है। बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 19वीं शताब्दी के मध्य में करवाया गया था।
जानिए क्यों झुका है यह मंदिर
यह मंदिर अन्य मंदिरों से अलग क्यों है, इसके पीछे भी एक कहानी है। बताया जाता है कि यह मंदिर राजा मानसिंह के एक सेवक ने अपनी माता रत्नाबाई के लिए बनवाया था। इस मंदिर को बनवाने के बाद उस सेवन ने बड़े गर्व से घोषणा की। सेवक ने कहा कि उसने अपनी मां का कर्ज उतार दिया है। कहा जाता है कि व्यक्ति के मुंह से जैसे ही यह शब्द निकले, वैसे ही मंदिर पीछे की ओर झुकने लगा। जिसका अर्थ यह निकाला गया कि मां के कर्ज को कभी चुकाया नहीं जा सकता है। वर्ष के ज्यादातर समय इस मंदिर का गर्भगृह गंगा के जल के नीचे रहता है।