Rudrabhishek In Sawan: Jalabhishek और Rudrabhishek में क्या है बड़ा अंतर? Sawan में आत्मिक शुद्धि के लिए महाउपाय

Aug 06, 2026
Astro Panchang
श्रावण माह का पवित्र महीना 30 जुलाई 2026 से शुरू हुआ है। यह महीना भगवान शिव को अतिप्रिय है। ऐसे में इस दौरान उनकी आराधना करने के साथ ही रुद्राभिषेक का खास महत्व बताया गया है। इस महीने रुद्राभिषेक सिर्फ इसलिए खास नहीं कि इसमें शिवलिंग पर जल अर्पित किया जाता है। बल्कि वैदिक परंपरा में 'रुद्र' के वैदिक मंत्रों के साथ महादेव का अभिषेक करना रुद्राभिषेक कहलाता है।
सावन के महीने में शिवोपासना के लिए बेहद खास माना जाता है। देवशयनी एकादशी से शुरू होने वाले चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु और शिवजी की उपासना का महत्व माना गया है। इसी साधना काल का प्रमुख महीना श्रावण का होता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि श्रावण माह में रुद्राभिषेक करवाना क्यों फायदेमंद होता है और श्रावण माह और रुद्राभिषेक के बीच क्या संबंध है।
श्रावण में रुद्राभिषेक का महत्व
शिव पुराण और स्कंद पुराण के मुताबिक सावन के महीने में महादेव की आराधना करने से विशेष फल मिलता है। पुराणों में श्रावण माह को भगवान शिव की पूजा और उपासना के लिए बेहद पुण्यकारी माना जाता है। ऐसे में रुद्राभिषेक का महत्व और फल दोनों बढ़ जाते हैं। यही वजह है कि सावन महीने में रुद्राभिषेक कराया जाता है। इससे व्यक्ति को भगवान शिव की कृपा प्राप्त होता है।
जानें सावन और रुद्राभिषेक का संबंध
धार्मिक मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना करना फलदायी होता है। वहीं श्रावण माह शिवजी को अतिप्रिय होता है। हरि शयन के बाद भगवान शिव के रुद्र अवतार सारे कार्यभार को संभालते हैं। धार्मिक मान्यता है कि श्रावण माह में रुद्राभिषेक कराने से शिवजी की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।