Mysterious Temples: Lord Shiva के शरीर के अंगों से बने हैं ये 5 मंदिर, जानें Panch Kedar का पूरा Divine Secret

Jun 18, 2026
Astro Panchang
हिंदू धर्म में पंचकेदार की तीर्थयात्रा को बेहद पवित्र माना जाता है। पंच केदार की यात्रा को मन, शरीर और आत्मा की शुद्धि का एक आध्यात्मिक मार्ग माना गया है। पंच केदार उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में स्थित है। पंच केदार की उत्पत्ति महाभारत काल की एक कथा से जुड़ी है। पौराणिक कथा के मुताबिक कुरुक्षेत्र के युद्ध के बाद पापों से छुटकारा पाने के लिए पांडव हिमालय पहुंचे। लेकिन भगवान शिव पांडवों से नाराज थे। जिस कारण महादेव पांडवों को दर्शन नहीं देना चाहते थे। इसलिए भगवान शिव बैल का रूप धारण करके धरती में लुप्त हो गए।
धार्मिक मान्यता है कि मुताबिक जब भगवान शिव बैल रूप में धरती में समाए तो उनके शरीर के अलग-अलग हिस्से हिमालय के पांच अलग-अलग स्थानों पर प्रकट हुए। इन्हीं 5 स्थानों पर पांडवों द्वारा भगवान शिव की पूजा की गई। जिसको पंच केदार के नाम से जाना जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको पंच केदार और इसके महत्व के बारे में बताने जा रहे हैं।
केदारनाथ
पंचकेदार में केदारनाथ मंदिर सबसे प्रमुख माना जाता है। यहां पर बैल रूपी अवतार की पीठ का हिस्सा प्रकट हुआ था। केदारनाथ को आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता है और हर साल भारी संख्या में श्रद्धालु केदारनाथ मंदिर आते हैं। यहां पर भगवान शिव की पूजा करने से जातक को पापों से मुक्ति मिलती है और शुभ फल की प्राप्ति होती है।
तुंगनाथ
धार्मिक मान्यता के अनुसार तुंगनाथ में भगवान शिव का हाथ प्रकट हुआ था। यह मंदिर सबसे ऊंचाई पर स्थित है। पांडवों ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तुंगनाथ मंदिर का निर्माण किया जाता है। माना जाता है कि यहां पर भगवान शिव के दर्शन से व्यक्ति को मन की शांति मिलती है।