Shardiya Navratri में महाष्टमी और महानवमी का संयोग, 19 अक्तूबर को संपन्न होंगे विशेष अनुष्ठान

Oct 19, 2026
Astro Panchang
आज यानी की 19 अक्तूबर को शारदीय नवरात्रि के महाष्टमी और महानवमी से जुड़े अनुष्ठान किए जा रहे हैं। क्योंकि तिथियों के संयोग की वजह से अष्टमी औऱ नवमी तिथि एक ही दिन है। ऐसे में दोनों तिथियों की पूजा एक ही दिन की जा रही है। वहीं नवमी तिथि को मां दुर्गा के 9वें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इस दौरान हवन, कन्या पूजन और व्रत पारण भी किया जाता है।
महानवमी तिथि
वैदिक पंचांग के मुताबिक 19 अक्तूबर को सुबह 10:51 मिनट से नवमी तिथि की शुरूआत हो रही है। वहीं इस तिथि की समाप्ति अगले दिन यानी की 20 अक्तूबर की दोपहर 12:50 मिनट पर होगी। उदयातिथि के स्पर्श के हिसाब से महानवमी भी 19 अक्तूबर को मनाई जा रही है।
कन्या पूजन
शारदीय नवरात्रि में अष्टमी औऱ नवमी दोनों तिथियों पर कन्या पूजन किया जाता है। ऐसे में आप भी अष्टमी और नवमी दोनों तिथि पर कन्या पूजन कर सकते हैं। 19 अक्तूबर को अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन के लिए पहला शुभ मुहूर्त सुबह 07:28 मिनट से लेकर सुबह 09:16 मिनट तक रहने वाला है। इसके बाद सुबह 11:43 मिनट से लेकर दोपहर 12:29 मिनट तक भी कन्या पूजन किया जा सकता है। क्योंकि इस दौरान अभिजीत मुहूर्त मान्य रहेगा।
महानवमी पर सिद्धिदात्री की पूजा
नवरात्रि के 9वें दिन मां दुर्गा के सिद्धदात्री स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक मां सिद्धिदात्री को विवेक, ज्ञान और सिद्धि देने वाली देवी माना जाता है। इस दिन भी हवन और कन्या पूजन का विधान होता है। इस दिन मां सिद्धिदात्री को फल, फूल, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित करें। वहीं पूजा के दौरान 'ऊँ देवी सिद्धिदात्र्यै नम:' मंत्र का जाप करें। मां सिद्धिदात्री को सफेद तिल से बनी चीजों का भोग अर्पित करें और आरती करें। आप इस दिन हवन भी कर सकते हैं।
हवन और व्रत पारण विधि
नवरात्रि के अंतिम दिनों में हवन करके पूजा का समापन किया जाता है। नवरात्रि में कन्या पूजन और हवन आदि करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। हालांकि कुछ लोग नवमी को व्रत पारण करते हैं, तो वहीं कुछ लोग दशमी को व्रत खोलते हैं।