Mangal Dosh Upay: Manglik Dosh का 28 की Age में खत्म होता है प्रभाव, जानें क्या कहता है Astrology Science

Feb 28, 2026
Astro Panchang
भारतीय समाज में जब बच्चे का जन्म होता है, तो उसकी कुंडली बनवाई जाती है। बच्चे की कुंडली कई बार जन्म के समय ही बना दी जाती है। वहीं कुछ लोग 5 साल की उम्र के बाद कुंडली बनवाते हैं। कई लोगों को ऐसा कहते भी सुना होगा कि कुंडली में मंगल भारी है, जिसकी वजह से मांगलिक दोष लग गया है। वहीं शादी में भी देरी हो रही है। बच्चे की कुंडली में अगर मांगलिक दोष होता है, तो ऐसा माना जाता है कि उसके जीवन में उतार-चढ़ाव बने रहेंगे।
कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर मांगलिक दोष क्या होता है। क्या मांगलिक दोष से शादी में देरी होती है और क्या निश्चित अवधि के बाद मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि मांगलिक दोष क्या है और इससे बाहर निकलने के लिए क्या उपाय करना चाहिए।
जानिए मांगलिक का अर्थ
मांगलिक शब्द सुनते ही लोग अक्सर इसको विवाह से जुड़ी किसी समस्या से जोड़ने लगते हैं। लेकिन इसका वास्तविक अर्थ इससे कहीं ज्यादा बड़ा है। मंगल का मतलब ही मंगलकारी है, यानी कि हर काम में शुभ फल देने वाला है। कुंडली में मंगल ग्रह को साहस, ऊर्जा, आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता और व्यक्ति की विल पावर का प्रतिनिधित्व करता है। जब किसी जातक की कुंडली में मंगल ग्रह कुछ विशेष भावों में स्थित होता है। जैसे पहला, चौथा, सांतवा, आठवां या बारहवां भाव हो तो जातक को मांगलिक कहा जाता है। माना जाता है कि जातक की कुंडली में मांगलिक दोष है।
कब लगता है मांगलिक दोष
ज्योतिष के मुताबिक मांगलिक दोष एक ज्योतिषीय स्थिति है, जो जातक के जीवन में विशेष रूप से वैवाहिक और पेशेवर जीवन में दुर्भाग्य और चुनौतियां ला सकती हैं। इस दोष की पहचान तब होती है, जब मंगल जन्म कुंडली के विशिष्ट भावों में स्थित होता है। हिंदू धर्म में, मांगलिक दोष का सीधा संबंध विवाह से होता है। ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि अगर किसी जातक की कुंडली में मंगल प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में हो, तो जातक को मांगलिक दोष से ग्रस्त माना जाता है।