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Jagannath Rath Yatra 2026: पुण्य फल और मोक्ष पाने के लिए श्रद्धालु जान लें ये 5 Rules

By Astro panchang | Jul 15, 2026

ओडिशा के पुरी में विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरूआत 16 जुलाई 2026 से हो रही है। आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से शुरू होने वाली इस 9 दिवसीय रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बदभद्र और बहन सुभद्रा गुंडिचा मंदिर की यात्रा करते हैं। ऐसे में अगर आप भी जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल होने जा रहे हैं। तो यह जान लेना जरूरी है कि आपको वहां पर किन नियमों का पालन करना होगा।

वहीं रथ यात्रा में शामिल होने से पहले रथ निर्माण, ओसर घर, छर पहनरा, गुंडीचा मार्जन, रथयात्रा का आरंभ, गुंडिचा मंदिर आगमन और पुन: मंदिर आगमन कब होता है, यह सब जानना जरूरी होता है। तो आइए जानते हैं रथ यात्रा से जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में...

रथ यात्रा के नियम

उड़ीसा के पुरी की विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा आस्था का एक ऐसा समंदर है। जहां पर भगवान खुद गर्भगृह से निकलकर भक्तों के बीच आते हैं।

यात्रा में शामिल

भगवान जगन्नाथ की अलौकिक रथ यात्रा का हिस्सा बनने के लिए किसी विशेष पात्रता की जरूरत नहीं होती है। इस रथ यात्रा में कोई भी व्यक्ति शामिल हो सकता है।

जो भी व्यक्ति भगवान जगन्नाथ की पावन रथ यात्रा में शामिल होता है। उसको 100 यज्ञों के समान पुण्यफल की प्राप्ति होती है।

तीनों रथों की संरचना

नंदीघोष की ऊंचाई 45 फीट और पहियों की संख्या 16 है। इस रथ को खींचने वाली पवित्र रस्सी का नाम शंखाचुड़ा नाड़ी है।

तालध्वज की ऊंची 43 फीट है और पहियों की संख्या 14 और इस रथ को खींचने वाली पवित्र रस्सी का नाम बासुकी है।

दर्पदलन रथ की ऊंचाई 42 फीट है और पहियों की संख्या 14 है। इसकी पवित्र रस्सी का नाम स्वर्णचूड़ा नाड़ी है।

यात्रा मार्ग और अवधि

इन तीनों विशाल रथों को श्रद्धालुओं द्वारा खींचकर 3 किमी दूर स्थित 'गुंडिचा मंदिर' ले जाया जाता है।

यहां गुंडिचा मंदिर में भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और बलभद्र 10 दिनों तक आराम करते हैं।

वहीं यात्रा के 11वें दिन भगवान फिर से अपने धाम लौट आते हैं।
 

रथ खींचने के नियम

भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचने के लिए किसी भी तरह का कोई कठोर नियम या फिर सामाजिक बंधन नहीं है।

यहां पर किसी भी तरह की जाति, धर्म, प्रांत या देश की कोई सीमा नहीं है। कोई भी व्यक्ति या भक्त इन रथों को खींच सकता है।

श्रद्धालु निश्चित क्रम से तीनों रथों की रस्सियों को श्रद्धापूर्वक खींचते हैं।

धार्मिक मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन और श्रद्धा भाव से भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचता है। तो वह जीवन-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है।

ऐसे करें जाने की तैयारी

अगर आप उड़ीसा से बाहर रहते हैं, तो आपको वहां पर स्टे का इंतजाम करना होगा। वरना आप परेशान हो सकते हैं, क्योंकि वहां पर रहने के सीमित साधन हैं।

अगर आपको पुरी के बाहर कहीं रुकने का स्थान मिलता है, तो उसको हायर कर सकते हैं।

पुरी में मंदिर के सामने ही समुद्र हैं, तो इस पूरे क्षेत्र में घूमने के लिए आपको कम से कम 3 दिन के लिए यात्रा प्लान करना चाहिए।

वहीं 3 दिन का खर्च कम से कम 4 से 5 हजार तक आ सकता है।

पुरी में जगन्नाथ मंदिर के दर्शन के अलावा अथरनाला ब्रिज, चिलका वन्यजीव अभयारण्य, पुरी का गुंडिचा मंदिर और समुद्री तट को एक्सप्लोर कर सकते हैं।

आप चाहें तो पुरी से कुछ किमी दूर कोणार्क मंदिर को देखने के लिए जा सकते हैं। हालांकि इसके लिए आपको 1 दिन और स्टे करना होगा।

रथ यात्रा के दौरान बहुत ज्यादा भीड़ होती है। ऐसे में अगर आप परिवार के साथ जा रहे हैं तो सभी की सुरक्षा का ध्यान रखें।

अगर आप बच्चों के साथ पुरी जा रहे हैं, तो रथ यात्रा के दर्शन दूर से करें। बाद में मंदिर में भगवान जगन्नाथ के दर्शन करें।

पुरी में आप पहले दिन जगन्नाथ मंदिर के दर्शन करें और रथ यात्रा का आनंद लें। फिर दूसरे दिन गुंडिचा मंदिर जा सकते हैं। वहीं यात्रा के तीसरे दिन समुद्र का आनंद ले सकते हैं।
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