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Nirai Mata Temple: यहां महिलाओं की है 'No Entry', बिना तेल-घी के जलती है अखंड ज्योति

By Astro panchang | Apr 15, 2026

भारत में कई ऐसे मंदिर हैं, जिनसे जुड़ी मान्यताएं हर किसी को हैरान कर देती हैं। ऐसा ही एक मंदिर छत्तीसगढ़ में भी है। छत्तीसगढ़ में मौजूद निरई माता मंदिर के प्रति लोगों की गहरी आस्था और श्रद्धा है। वहीं निरई माता मंदिर से जुड़ी मान्यताएं भी बेहद अनोखी हैं। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इस मंदिर में महिलाओं का प्रवेश पूरी तरह से वर्जित है। वहीं साल में सिर्फ 5 घंटे के लिए निरई माता का मंदिर खुलता है। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको निरई माता मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के बारे में बताने जा रहे हैं।

पूरी होती हैं सभी मनोकामनाएं

छत्तीसगढ़ के धमतरी के मगरलोड क्षेत्र में घने जंगलों और ऊंची पहाड़ियों के बीच स्थित निरई माता भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है। दुर्गम रास्तों और उबड़-खाबड़ पहाड़ियों पर स्थित होने के बाद भी भक्त यहां पर दर्शन के लिए आते हैं। इस मंदिर में भक्त देवी मां को नारियल, नींबू और अगरबत्ती भेंट करते हैं। माना जाता है कि इससे मां प्रसन्न होती हैं और जातक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

अनोखा मंदिर

बता दें कि निरई माता का मंदिर बेहद रहस्यमयी और अनोखा सिद्धपीठ है। यहां पर साल में सिर्फ एक बार यानी कि चैत्र नवरात्रि के पहले रविवार पर सुबह 4 से 9 बजे यानी की मात्र 5 घंटों के लिए खुलता है। सीमित समय के लिए मंदिर खुलने की वजह से भक्तों की मंदिर में भारी भीड़ उमड़ती है।

इस मंदिर में मां की मूर्ति स्थापित नहीं है, बल्कि एक पवित्र गुफा में ज्योत प्रज्वलित होती है। इस ज्योति को लेकर मान्यता है कि नवरात्रि के पावन मौके पर यह ज्योति बिना घी, तेल और माचिस के अपने आप प्रज्वलित हो जाती है।

जानिए क्या हैं मान्यताएं

अगर मंदिर से जुड़ी मान्यताओं की बात की जाए, तो महिलाओं का इस मंदिर में प्रवेश पूरी तरह से वर्जित है। इस मंदिर में सिर्फ पुरुष ही पूजा-पाठ कर सकते हैं। इसके पीछे एक पुरानी किवदंती भी मिलती है। जिसके मुताबिक प्राचीन काल में पहाड़ियों के बीच एक बैगा पुजारी मां निरई की श्रद्धा और सच्चे मन से सेवा करता है, जिससे देवी मां अति प्रसन्न थीं।

देवी मां स्वयं पुजारी को स्नान व भोजन कराती थीं। लेकिन इससे पुजारी की पत्नी के मन में संदेह पैदा हो गया। इस बात से देवी बेहद क्रोधित हो गईं और उन्होंने यह आदेश दिया कि भविष्य में कोई भी स्त्री उनका दर्शन नहीं करेगी। तभी यह मान्यता चली आ रही है कि महिलाओं का मंदिर में प्रवेश वर्जित है।
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