By Astro panchang | Sep 22, 2026
भगवान विष्णु ने धरती को अधर्म से बचाने के लिए और धर्म की रक्षा के लिए कई बार अवतार लिया। ऐसा ही एक अवतार कल्कि अवतार है। माना जाता है कि कल्कि अवतार लेकर भगवान विष्णु कलियुग का अंत करेंगे। लेकिन भगवान विष्णु के अंतिम अवतार कल्कि के जन्म को लेकर कई रहस्य देखने को मिलते हैं। हिंदू शास्त्रों के अनुसार, जब धरती पर पाप और अधर्म अपने चरम पर होगा, तो इसको खत्म करने और धर्म की स्थापना के लिए भगवान विष्णु कलियुग में कल्कि अवतार लेगें।
माना जाता है कि भगवान विष्णु का कल्कि का जन्म आम मनुष्य के तौर पर होगा। भले ही अभी तक भगवान विष्णु कलियुग का अंत करने के लिए कल्कि रूप में धरती पर अवतरित नहीं हुए हैं, लेकिन उनके आने से पहले ही भगवान कल्कि के एक मंदिर का निर्माण हो चुका है।
राजस्थान के जयपुर में भगवान कल्कि को समर्पित एक मंदिर है, जोकि करीब 300 साल पुराना माना जाता है। यह मंदिर अपनी आध्यात्मिकता के लिए नहीं बल्कि अपने गहरे रहस्यों के लिए जाना जाता है।
कल्कि मंदिर भारत के उन मंदिरों में शामिल है, जिनका संबंध भगवान कल्कि और कलियुक के अंत से जुड़ा है। धार्मिक शास्त्रों और प्राचीन मान्यताओं के मुताबिक कलियुग के अंत में भगवान कल्कि अवतार लेंगे। वहीं इस मंदिर का करीब 18वीं शताब्दी में कराया गया था।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक जयपुर शहर के संस्थापक महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने कल्कि मंदिर का निर्माण कराया था। इस मंदिर में भगवान कल्कि के अलावा उनके घोड़े की भी पूजा की जाती है।
वहीं कई धार्मिक ग्रंथों में इस बात का जिक्र मिलता है कि भगवान कल्कि अपने दिव्य और श्वेत घोड़े पर सवार होकर कलियुग का अंत करेंगे और भगवान कल्कि के घोड़े का नाम देवदत्त होगा।
राजस्थान के इस मंदिर में न सिर्फ भगवान कल्कि बल्कि उनका घोड़ा भी रहस्य का केंद्र है। मंदिर के गर्भगृह में मुख्य मूर्ति के साथ घोड़े की मूर्ति भी है।
इस मंदिर की हैरान करने वाली बात यह है कि मंदिर के प्रवेश द्वार पर घोड़े की मूर्ति है, जोकि एक अलग सफेद संगमरमर की है। घोड़े की मूर्ति के पिछले बाएं पैर में दरार है। जिसको स्थानीय लोग घाव मानते हैं।
माना जाता है कि जब घोड़े के पैर की दरार भर जाएगी, तब भगवान कल्कि पृथ्वी पर अवतरित होंगे। वहीं यहां के स्थानीय पुजारी और लोगों का मानना है कि सालों से यह घाव भर रहा है।
वहीं हैरान करने वाली बात यह भी है कि अभी तक धरती पर कल्कि भगवान नहीं आए हैं, लेकिन भारत में कई कल्कि मंदिर हैं और इन मंदिरों में विधि-विधान से भगवान कल्कि की पूजा-अर्चना की जाती है।