होम
कुंडली
टैरो
अंक ज्योतिष
पंचांग
धर्म
वास्तु
हस्तरेखा
राशिफल
वीडियो
हिन्दी न्यूज़
CLOSE

Devi Bhagwat Purana: Maa Durga का दिव्य वाहन शेर कैसे बना, जानिए देवी पार्वती के गौरी बनने की कथा

By Astro panchang | Sep 19, 2026

हिंदू धर्म में मां दुर्गा को असीम दिव्य शक्ति और ऊर्जा की सर्वोच्च देवी के रूप में पूजा जाता है। देवी दुर्गा को आदि शक्ति, जगत जननी और ब्रह्मांड की माता माना जाता है। जोकि ज्ञान और बुराई को खत्म करके धर्म की रक्षा करती हैं। भारत में देवी दुर्गा को समर्पित कई मंदिर हैं, जहां पर मां दुर्गा की पूजा होती है। वहीं मां दुर्गा का दिव्य वाहन शेर है, जिस पर मां दुर्गा सवार होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शक्तिशाली शेर मां दुर्गा का वाहन कैसे बना। आज हम इस आर्टिकल के जरिए इस पौराणिक कथा के बारे में बताने जा रहे हैं।

भूखा शेर बना मां दुर्गा का वाहन

महर्षि व्यास द्वारा रचित 'श्रीमद् देवीभागवत पुराण' मां दुर्गा की उत्पत्ति और उनके कर्तव्यों को समर्पित है। शेर की मां दुर्गा के वाहन बनने की कहानी तब शुरू होती है, जब देवी पार्वती भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए घोर तपस्या कर रही थीं।

कई सालों की तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव देवी पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार कर लेते हैं। इसी बीच तपस्या के प्रभाव से देवी पार्वती का रंग काला पड़ गया था। एक दिन भगवान शिव देवी पार्वती को काली कह देते हैं, यह बात देवी पार्वती को अच्छी नहीं लगती है और वह नाराज होकर फिर से तपस्या करने चली जाती हैं।

भगवान शिव का आशीर्वाद

पौराणिक कथाओं के मुताबिक जब मां पार्वती तपस्या कर रही थीं, उस दौरान वहां पर एक शेर घूमते-घूमते आ गया। मां को खाने की इच्छा रखने वाला शेर मां पार्वती का तप पूरा होने का इंतजार करता है। समय बीतता जाता है और शेर तपस्या खत्म होने का इंतजार करता है। जब सालों बीत जाते हैं और शेर का देवी पार्वती का इंतजार करता रहा, तब देवी को खाने की इच्छा के साथ वह देवी पार्वती के पास जाता है, लेकिन देवी के तप के तेज से वह पीछे हट जाता है। कई बार कोशिश करने के बाद भी शेर उनके पास नहीं जा पाता है और कोने में बैठ जाता है। फिर मां पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव वहां प्रकट होते हैं और देवी पार्वती से वरदान मांगने को कहते हैं।

मां पार्वती कहती हैं कि उनको पहले की तरह गोरा रंग वापस मिल जाए। महादेव उनकी इच्छा पूरी करती हैं। आशीर्वाद मिलने ही देवी पार्वती नहाने चली जाती हैं। उनसे स्नान करते ही शरीर से एक अन्य देवी प्रकट होती हैं, जिनका नाम कौशिकी पड़ता है। नहाने के समय देवी पार्वती के शरीर से काला रंग निकल जाता है और पहले की तरह उनका रंग साफ हो जाता है। जिस वजह से मां पार्वती का नाम गौरी पड़ जाता है। जब देवी पार्वती की नजर शेर पर पड़ती है, जो उनको खाने के इंतजार में एक कोने में बैठा था।

तो मां पार्वती भगवान शिव के पास जाती हैं और उनसे वरदान मांगती हैं कि इस शेर ने उनको खाने के लिए सालों तक इंतजार किया है। जितना तप मैंने किया, उतना ही तब इस शेर ने भी किया है। इस वजह से आप इस शेर को वरदान के रूप में मेरी सवारी बना दीजिए। शिव मां पार्वती की इस बात से खुश हो जाते हैं और शेर को देवी पार्वती की सवारी बना देते हैं। तभी से देवी पार्वती का नाम शेरावाली और मां दुर्गा पड़ा।

Copyright ©
Dwarikesh Informatics Limited. All Rights Reserved.