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Shiv Khori Mandir: Jammu की Shiv Khori Cave का वो Secret, जहां से आज तक कोई नहीं लौटा वापस

By Astro panchang | Feb 04, 2026

आज भी यह माना जाता है कि भगवान शिव अपने परिवार के साथ कैलाश पर्वत पर निवास करते हैं। कैलाश पर्वत पर भगवान शिव के साथ मां पार्वती, कार्तिकेय और भगवान गणेश भी रहते हैं। वह आज भी सपरिवार कैलाश पर्वत पर विराजमान हैं। लेकिन एक ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव कैलाश पर्वत पर नहीं बल्कि जम्मू-कश्मीर की एक गुफा में रहते हैं। यह पवित्र गुफा जम्मू-कश्मीर के लोगों में काफी ज्यादा प्रसिद्ध है।

यहां के स्थानीय लोगों के मुताबिक यह पवित्र गुफा ही भगवान शिव का निवास स्थान है। इस गुफा को शिव खोड़ी गुफा के नाम से जाना जाता है। दरअसल, यह एक गुफा नहीं बल्कि एक सुरंग लगती है। इसके बारे में कहा जाता है कि इस गुफा का दूसरा छोर सीधा अमरनाथ गुफा में जाकर खुलती है।

भगवान शिव की चमत्कारी गुफा

जम्मू से करीब 140 किमी की दूरी पर ऊधमपुर नामक जगह पर भगवान शिव की चमत्कारी गुफा मौजूद है। शिवखोड़ी नामक इस गुफा के अंदर जाने की हिम्मत कोई भी नहीं करता है। लेकिन इस पवित्र गुफा के दर्शन के लिए रोजाना बड़ी तादात में भक्त आते हैं। माना जाता है कि जो भी व्यक्ति इस गुफा के अंदर गया है, वह आज तक वापस नहीं आया।

यहां के स्थानीय लोगों का मानना है कि प्राचीन समय में इसी गुफा से होकर साधु-संत बाबा अमरनाथ जाते थे। लेकिन कलियुग में कोई ऐसा महापुरुष नहीं हुआ, जो इस गुफा में प्रवेश करने की हिम्मत रखता हो। इस पवित्र गुफा में जो भी प्रवेश करता है, वह लौटकर वापस नहीं आता है।

शिव खोड़ी गुफा की एक खासियत और भी है, जो इसको बाबा अमरनाथ गुफा की तरह चमत्कारी बनाती है। जिस तरह से बाबा अमरनाथ की गुफा में प्राकृतिक शिवलिंग है, ठीक उसी तरह से शिव खोड़ी गुफा में भी अपने आप ही शिवलिंग बना है। इसको किसी ने नहीं बनाया है। लेकिन अंतर सिर्फ इतना है कि यह शिवलिंग बर्फ से नहीं बना है, बल्कि यह चट्टान द्वारा लिए गए आकार की वजह से बना है। इसको लोग भगवान शिव का आशीर्वाद मानकर पूजते हैं।

भगवान शिव का निवास कही जाने वाली यह पवित्र गुफा 3 मीटर ऊंची और 200 मीटर लंबी है। यह गुफा 1 मीटर चौड़ी और 2-3 मीटर ऊंची है। इस गुफा में कई प्राकृतिक चीजें जैसे नंदी की मूर्ति और पार्वती की मूर्ति आदि है। वहीं हैरान करने वाली बात यह है कि इस गुफा की छत पर सांप की आकृतियां भी बनी हैं, जो यहां पर अपने आप बनी है।

पौराणिक कथा

शिवखोड़ी गुफा से जुड़ी एक पौराणिक कथा है। पौराणिक कथा के मुताबिक इस गुफा को स्वयं भगवान शिव ने बनाया था। भस्मासुर ने तप करके महादेव को प्रसन्न किया था और शिवजी से यह वरदान पाया कि वह जिसके भी सिर पर हाथ रखे, वह भस्म हो जाएगा। शिवजी ने असुर को वरदान तो दे दिया, लेकिन वह उसकी मंशा से अवगत नहीं थे। वरदान मिलते भस्मासुर ने शिवजी के सिर पर हाथ रखकर उनको भस्म करना चाहा।

तब भगवान शिव और भस्मासुर में भीषण युद्ध हुए और इसके बाद भी भस्मासुर ने हार नहीं मानी। ऐसे में महादेव वहां से निकलकर ऊंची पहाड़ी पर पहुंचे और वहां पर एक गुफा बनाकर उसमें छिप गए। माना जाता है कि शिव खोड़ी वही गुफा है, जहां पर शिवजी छिपे थे। भगवान शिव के छिप जाने के बाद भगवान विष्णु ने सुंदर स्त्री का रूप लिया, जिसको देखकर भस्मासुर मोहित हो गया और सुंदरी रूप में विष्णु के साथ नृत्य में भस्मासुर भगवान शिव द्वारा दिए गए वरदान को भूल गया।

ऐसे में भस्मासुर ने नृत्य के दौरान अपने सिर पर हाथ रख लिया और वह भस्म हो गया। शिवखोड़ी गुफा में रोजाना हजारों की संख्या में भक्त मन्नत मांगने के लिए आते हैं। माना जाता है कि जो भी सच्चे दिल से यहां आकर मन्नत मांगता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है।
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