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Hemkund Sahib History: Dasam Granth में छिपा था Hemkund Sahib का रहस्य, Guru Gobind Singh ने यहीं की थी पिछले जन्म में तपस्या

By Astro panchang | Feb 23, 2026

हेमकुंड साहिब की तीर्थ यात्रा सबसे कठिन तीर्थ यात्राओं में से एक है। क्योंकि यह गुरुद्वारा समुद्र तल से करीब 15 हजार फुट से ऊपर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां सिर्फ पैदल यात्रा करके ही पहुंचा जा सकता है। इस कठिन यात्रा के बाद भक्त पूरी श्रद्धाभाव के साथ इस यात्रा को पार करते हुए हेमकुंड साहिक के दर्शन के लिए जाते हैं। वहीं इस जगह का संबंध लक्ष्मण जी के साथ भी माना जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको हेमकुंड के रहस्यमयी इतिहास के बारे में बताने जा रहे हैं।

जानिए हेमकुंड साहिब का इतिहास

दसम ग्रंथ में वर्णन मिलता है कि इस स्थान पर सिखों के 10वें और अंतिम गुरु यानी श्री गुरु गोबिंद सिंह ने अपने पिछले जन्म में कठिन तपस्या की थी। यही वजह है कि सिख धर्म में हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा का ज्यादा महत्व है। हिंदू धर्म में यह स्थान उतना ही महत्व रखता है। मान्यता है कि रामायण काल में इस स्थान पर लक्ष्मण जी ने ध्यान किया था। यहां पर लक्ष्मण जी द्वारा स्थापित एक मंदिर भी है।

हेमकुंड साहिब को ऐसे मिली पहचान

बता दें कि हेमकुंड की खोज के पीछे भी एक रोचक कथा है। दो से अधिक सदियों तक श्री हेमकुंड साहिब गुमनामी में रहा। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपनी आत्मकथा विचित्र नाटक में इस जगह का जिक्र किया था। जिसके बाद यह स्थान अस्तित्व में आया था। वहीं पंडित तारा सिंह नरोत्तम हेमकुंड की भौगोलिक स्थिति का पता लगाने वाले सिख माने जाते हैं। श्री गुड़ तीरथ संग्रह में उन्होंने हेमकुंड साहिब का को 508 सिख धार्मिक स्थलों में से एक बताया।

जानिए कुछ खास बातें

हेमकुंड एक संस्कृत नाम शब्द है। इसका अर्थ हेम यानी बर्फ और कुंड यानी कि कटोरा। बर्फ से घिरे कटोरे जैसी झील की वजह से इस स्थान का नाम हेमकुंड पड़ा। पहाड़ों से घिरी इस जगह पर एक बड़ा तालाब है। जिसको लोकपाल कहते हैं।
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