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Dasha Mata Vrat Katha: पढ़ें राजा नल और रानी दमयंती की संपूर्ण Vrat Katha, जिससे खुल जाते हैं भाग्य

By Astro panchang | Apr 11, 2026

चैत्र माह के कृष्ण पक्षी की दशमी तिथि को दशा माता का व्रत किया जा रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक दशा माता देवी पार्वती का एक स्वरूप हैं, जिनका वाहन ऊंट है। दशा माता के व्रत में नीम, पीपल और बरगद की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक ऐसा कहा जाता है कि जो भी भक्त दशा माता का व्रत करके उनका डोरा बांधता है, उसको कभी धन-संपत्ति की कमी नहीं होती है। दशा माता व्रत का पूरा लाभ उठाने के लिए इनकी कथा जरूर पढ़नी चाहिए।

दशा माता व्रत की कथा

प्राचीन काल में एक नल नामक राजा हुआ करता था। वह अपनी पत्नी दयमंती के साथ राज किया करते थे। रानी दमयंती दशा मां की भक्त थीं और पूरी श्रद्धा के साथ व्रत करती थीं और पूजा करती थीं। एक बार राजा नल ने रानी के गले में धागा देखा और इसके बारे में पूछा तो रानी ने दशा माता की पूजा के बारे में बताया। राजा नल को उनकी बातों पर भरोसा नहीं हुआ और रानी के गले से धागा निकालकर फेंक दिया।

ऐसा करने में राजा नल पर दशा माता कुपित हो गईं। वहीं राजा नल जुएं में अपना राजपाठ हारकर वन में भटकने लगे। राजा नल पर चोरी का भी आरोप लगा। राजा रानी की स्थिति यह हो गई कि उनको अपने भरण पोषण के लिए जंगल से लकड़ी काटकर बेचने लगे। रानी दमयंती का माता दशा पर अटूट विश्वास था। जब दोबारा चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की दशमी आई, तो राजा और रानी दोनों ने पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ माता का व्रत और पूजा की। उसी रात दशा माता ने रानी को स्वप्न में आकर आशीर्वाद दिया। 

जब रानी दमयंती ने राजा को यह बात बताई, तो राजा ने कहा कि मां के आशीर्वाद से हमारे पुराने दिन जरूर लौट आएंगे। धीरे-धीरे राजा की स्थिति में सुधार होने लगा। वहीं दशा मां की कृपा से राजा नल को अपना खोया हुआ राज्य वापस मिल गया। इस तरह जो भी दशा माता का व्रत करता है, उसके जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। इसलिए सभी भक्तों को पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ माता दशा की पूजा करनी चाहिए। वहीं स्त्रियों को कथा-पूजन कर धागा पहनना चाहिए।
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