By Astro panchang | Oct 16, 2026
उज्जैन को महाकाल की नगरी के नाम से जाना जाता है। उज्जैन की शान महाकालेश्वर मंदिर है, लेकिन शहर में कुछ ऐसे भी मंदिर हैं, जिनकी मान्यताएं अनोखी होने के साथ-साथ हैरान करने वाली भी हैं। उज्जैन के मध्य में हरसिद्धि मंदिर स्थित है, जोकि शहर के सबसे पूजनीय पीठों में से एक माना जाता है। शिव पुराण में भी इस मंदिर का उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यता है कि इस स्थान पर माता सती की कोहनी गिरी थी।
हरसिद्धि शक्तिपीठ मंदिर के पीछे एक ऐसी देवी का मंदिर है, जिनको वर सिद्धि माता के नाम से जाना जाता है। वर सिद्धि यानी को योग्य वर का आशीष देने वाली देवी।
इस मंदिर से जुड़ी मान्यता है कि जो भी कुंवारे लड़के या लड़कियां मां के दरवाजे की सांकल बजाकर विवाह की मनोकामना का धागा बांधती हैं, उनकी जल्द ही शादी हो जाती है।
हरसिद्धि मंदिर के पीछे सीढ़ियों के पास वरसिद्धि देवी का मंदिर है। हालांकि यह मंदिर छोटा सा है। मंदिर के अंदर देवी की प्रतिमा है और इस मंदिर में आने वाले युवक-युवतियां मंदिर के दरवाजे की सांकल को बजाती हैं और मन्नत का धागा बांधती हैं। इसको पचरंगी धागा कहा जाता है। इस धागे में तीन या पांच गांठ लगाई जाती हैं।
वहीं मंदिर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाने की परंपरा भी है। जब भी भक्त मां वरसिद्धि के दर्शन और पूजन के लिए जाते हैं, तो दीवार पर उल्टा स्वास्तिक बनाते हैं। जिससे कि विवाह की मनोकामना पूरी हो सके। वहीं जिन लोगों की मनोकामना पूरी हो जाती है, वह फिर से दर्शन करने के बाद सीधा स्वास्तिक बनाते हैं और देवी वरसिद्धि को पूजन की सामग्री समेत प्रसाद भेंट करते हैं।
हरसिद्धि मंदिर के पीछे स्थित वरसिद्धि मंदिर भी बेहद प्राचीन है। शादी से जुड़ी ऐसी मान्यता की वजह से जिन लोगों के विवाह में देरी होती है, वह युवक और युवतियां मंदिर में रोजानाधागे बांधते हैं।