आपको जानकर हैरानी होगी कि कुछ मंदिरों में महिलाओं का प्रवेश करना वर्जित माना जाता है। प्राचीन मान्यताओं, लोक परंपराओं और सदियों पुरानी रीति-रिवाजों की वजह से कुछ मंदिरों में महिलाओं का प्रवेश वर्जित माना जाता है। यह मंदिर सिर्फ पूजा स्थल ही नहीं बल्कि अपने आप में सदियों पुरानी भक्ति, शक्ति और रहस्यों से भरी कहानियों को समाहित किए हुए हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको देश के 5 ऐसे मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पर आज भी महिलाओं के प्रवेश पर नो एंट्री है।
सबरीमाला मंदिर
केरल का सबरीमाला मंदिर भारत के सबसे फेमस तीर्थ स्थलों में से एक है। जहां भगवान अयप्पा के ब्रह्मचर्य से जुड़ी सदियों पुरानी मान्यताओं की वजह से महिलाओं के प्रवेश की मनाही है।
केरल का यह मंदिर दुनियाभर में भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता है। 41 दिनों का उपवास के दौरान जो भी भक्त उनकी गहन शक्ति और अनुशासन को दर्शाता है। हालांकि इस मामलों को लेकर कानूनी लड़ाई जारी है। लेकिन फिर भी आध्यात्मिक परंपरा मजबूत बनी है।
शनि शिंगणापुर मंदिर
महाराष्ट्र का शनि शिंगणापुर मंदिर भगवान शनि देव को समर्पित है। यहां पर गर्भ गृह में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति नहीं है। क्योंकि मान्यताओं के मुताबिक शनि की शक्तिशाली ऊर्जा महिलाओं पर अलग तरह से असर दिखा सकती है।
शनि शिंगणापुर मंदिर अपनी चमत्कारी कहानियों को लेकर फेमस है। इन कहानियों में चोरी की गई चीजों को लौटाने वाले चोरों की कहानियां भी शामिल हैं।
गुरुवायूर मंदिर
केरल का एक और गुरुवायूर मंदिर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। यहां पर मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के लिए कड़े नियम हैं।
परंपराओं के मुताबिक महिलाओं को कुछ गर्भ गृह में प्रवेश नहीं करने दिया जाता है। जोकि अनुष्ठानिक पवित्रता में सदियों पुरानी मान्यताओं को दर्शाता है। श्रद्धालु इसको दैवीय निर्देश मानते हैं। जोकि भेदभाव की जगह आध्यात्मिकता पर आधारित है।
कोटिलिंगेश्वर मंदिर
कर्नाटक का कोटिलिंगेश्वर मंदिर लाखों शिवलिंग के लिए फेमस है। सदियों पुरानी परंपराओं के अनुसार, आध्यात्मिक एनर्जी को सुरक्षित करने की परंपरा के तहत खास पर्व-त्योहारों के दौरान मंदिर के कुछ आंतरिक क्षेत्रों में महिलाओं को जाने की मनाही है। यह मंदिर ध्यान, गहरी भक्ति और तपस्या का प्रतीक माना जाता है।
मूकाम्बिका मंदिर
कर्नाटक का मूकाम्बिका मंदिर कोडाचाद्री पहाड़ियों पर बसा है। यह मंदिर मूकाम्बिका देवी को समर्पित है। इस मंदिर की ऐतिहासिक परंपराओं के मुताबिक कुछ आयु वर्ग की महिलाओं को पारंपरिक रूप से मंदिर के कुछ हिस्सों में प्रवेश की अनुमति नहीं देता है।
नवरात्रि और अन्य त्योहारों के दौरान हजारों की संख्या में तीर्थयात्री इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। जोकि अनुशासन, आस्था और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रतीक है।