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Famous Shiv Temple: Kashi से Kanpur तक, UP के इन 5 शिव मंदिरों की है सदियों पुरानी मान्यता और पहचान

By Astro panchang | Apr 08, 2026

देश में भगवान शिव को समर्पित कई मंदिर हैं। भगवान शिव को 'देवों के देव महादेव' कहा जाता है। वहीं शिवभक्त शिवालयों में जाकर भी भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। लेकिन अगर आप यूपी में रहते हैं। तो बता दें कि उत्तर प्रदेश में भी भगवान शिव के कई प्राचीन और ऐतिहासिक शिव मंदिर हैं, जोकि सदियों से भक्तों की आस्था का केंद्र रहे हैं।
 
ऐसे में अगर आप भी भगवान शिव की कृपा और आशीर्वाद पाना चाहते हैं, तो आप इन मंदिरों में भगवान शिव के दर्शन के लिए जा सकते हैं। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको यूपी में स्थित भोलेनाथ के 5 ऐसे शिव मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनकी सदियों से मान्यता है।

काशी विश्वनाथ, वाराणसी

यह मंदिर वाराणसी में स्थित है और देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है।
गंगा तट के किनारे स्थित यह मंदिर मोक्षदायिनी काशी की पहचान है।
यहां भक्ति और पूजन करने से व्यक्ति को जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है।
महाशिवरात्रि और सावन महीने में यहां भक्तों की भारी भीड़ होती है।

गोला गोकर्णनाथ, लखीमपुर-खीरी

गोला गोकर्णनाथ मंदिर को 'छोटा काशी' के नाम से जाना जाता है।
इस शिवलिंग पर रावण के अंगूठे का निशान है।
शिवरात्रि में यह मंदिर भक्तों से खचाखच भरा रहता है।
स्थानीय और आसपास के लोग और दूर-दूर से भक्त यहां आते हैं।

मनकामेश्वर मंदिर, आगरा

मनकामेश्वर मंदिर आसपास के इलाकों और शहरवासियों के लिए भक्ति का बड़ा केंद्र है।
यह मंदिर आगरा के दिल यानी की सेंटर में मौजूद है।
यहां पर भक्त अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए नियमित आते हैं।
माना जाता है कि इस मंदिर की स्थापना स्वयं भगवान शिव ने की थी।

परमट मंदिर, कानपुर

कानपुर में स्थित यह मंदिर एक प्राचीन स्थल है।
ऐतिहासिक दृष्टि से भी यह मंदिर काफी महत्वपूर्ण है।
मंदिर परिसर में भव्य नंदी और शिवलिंग के दर्शन श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कराते हैं।
इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है।
माना जाता है कि यहां पर दानवीर कर्ण गंगा स्नान के बाद शिवजी का पूजन करते थे।

दुग्धेश्वर नाथ मंदिर, गाजियाबाद 

यह मंदिर अपनी अनोखी मान्यता के लिए फेमस है।
भक्तों का मानना है कि शिवलिंग पर दूध चढ़ाने से विशेष फल की प्राप्ति होती है और व्यक्ति की मनोकामना पूरी होती है।
मंदिर में नियमित पूजा होती है और परंपरागत आयोजन किए जाते हैं।
धार्मिक मान्यता के मुताबिक दशानन रावण ने इस स्थान पर भोलेनाथ की पूजा की थी।
इस मंदिर को 'हिरण्यगर्भ महादेव मंदिर मठ' के रूप में भी जाना जाता है।
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