By Astro panchang | Oct 19, 2026
सनातन धर्म में देवी सरस्वती को संगीत, कला, ज्ञान, बुद्धि और विद्या की देवी हैं। नवरात्रि के समय की जाने वाली चार दिवसीय सरस्वती पूजा के चौथे और आखिरी दिन सरस्वती विसर्जन का होता है। सरस्वती विसर्जन को सरस्वती उद्वासन के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मां सरस्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है और उनका विसर्जन कर विदा ली जाती है। इस दौरान मां सरस्वती से विद्या, बुद्धि और ज्ञान प्रदान किए जाने का आशीर्वाद मांगना चाहिए। इस बार आज यानी की 19 अक्तूबर को सरस्वती विसर्जन किया जा रहा है।
वैदिक पंचांग के मुताबिक सरस्वती विसर्जन 19 अक्तूबर 2026 को किया जा रहा है। इस दौरान 19 अक्टूबर को श्रवण नक्षत्र के दौरान लगभग दोपहर 3:38 बजे से रात 10:14 बजे तक विसर्जन का शुभ समय है। हालांकि पंचांग के हिसाब से मुहूर्त अलग-अलग हो सकता है।
विसर्जन से पहले देवी सरस्वती की विधिवत पूजा की जाती है। फिर देवी को पुष्प अर्पित करें। अक्षत, चंदन और नैवेद्य चढ़ाएं। पुस्तकों, वाद्य यंत्रों और अध्ययन सामग्री की भी पूजा करें। सरस्वती मंत्र का जाप करें। ज्ञान और विवेक की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करें। आरती करें। इसके बाद श्रद्धा और स्थानीय परंपरा के अनुसार देवी की प्रतिमा का विसर्जन करें। पंचांग परंपरा में सरस्वती विसर्जन को सरस्वती उद्वासन भी कहा जाता है।
शारदीय नवरात्रि में मां सरस्वती की पूजा का विशेष विधान माना जाता है। दक्षिण भारत और कुछ अन्य क्षेत्रों में इस दौरान मां सरस्वती आह्वान, सरस्वती पूजा और सरस्वती विसर्जन की परंपरा है। सरस्वती विसर्जन सिर्फ देवी सरस्वती की प्रतिमा को विदा करने की परंपरा नहीं बल्कि मां सरस्वती से ज्ञान, बुद्धि और रचनात्मकता प्राप्त करने का साधन भी है।