ललिता सप्तमी का व्रत देवी ललिता को समर्पित होता है। इस बात 30 अगस्त 2025 को ललिता सप्तमी का व्रत किया जा रहा है। धार्मिक मान्यता है कि ललिता सप्तमी का व्रत करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। साथ ही नवविवाहित जोड़ों को विशेष आशीर्वाद भी मिलता है। जो भी जातक ललिता सप्तमी पर श्रद्धा और भक्ति भाव से पूजा और व्रत करता है, उसके जीवन में सुख-समृद्धि, सौभाग्य और प्रेम बढ़ता है। पुराणों में भी इस बात का उल्लेख मिलता है कि देवी ललिता शक्ति स्वरूपा हैं और उनका पूजन करने से वैवाहिक जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
पूजा विधि
इस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की साफ-सफाई करके वहां पर राधा-कृष्ण और देवी ललिता की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। वहीं पूजा शुरू करने से पहले हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें और देवी ललिता को लाल रंग के वस्त्र, फल-फूल, श्रृंगार का सामना और मिठाई आदि अर्पित करें। पूजा में तुलसी दल जरूर शामिल करें। पूजा करने के साथ ही 'ॐ ह्रीं ललितायै नमः' मंत्र का जाप करें।
आप चाहें तो पूजा के समय राधा-कृष्ण के नाम का भी जाप कर सकते हैं। पूजा के आखिरी में देवी ललिता और देवी राधा व श्रीकृष्ण की आरती करें। पूरा दिन व्रत करें और शाम को पूजा के बाद फलाहार कर सकते हैं।
राधा अष्टमी से संबंध
बता दें कि ललिता सप्तमी के ठीक एक दिन बाद अष्टमी तिथि को देवी राधा का जन्मोत्सव मनाया जाता है। जिसको राधा अष्टमी भी कहा जाता है। ललिता सप्तमी पर राधा और श्रीकृष्ण की प्रिय सखी ललिता का पूजन किया जाता है और ठीक एक दिन बाद राधा रानी की पूजा की जाती है। यह दोनों ही पर्व एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। ललिता सप्तमी का पर्व न सिर्फ एक धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह प्रेम और विश्वास को मजबूत करने का भी अवसर देता है।