मत्स्य अवतार भगवान श्रीहरि विष्णु के पहले अवतार हैं। सतयुग में मत्स्य अवतार में श्रीहरि एक मछली के रूप में प्रकट हुए थे। उन्होंने जल प्रलय से राजा सत्यव्रत, प्रजापतियों और सप्तऋषियों की रक्षा की थी। मत्स्य जयंती पर भक्त व्रत करते हैं और भगवान विष्णु के मस्त्य अवतार की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन भगवान विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्रम् का पाठ करना शुभ माना जाता है। इस बार आज यानी की 21 मार्च 2026 को मत्स्य जयंती मनाई जा रही है। तो आइए जानते हैं इस दिन की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में...
तिथि और मुहूर्त
चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरूआत 21 मार्च की रात 02:30 मिनट पर शुरू हो रही है। वहीं इस तिथि की समाप्ति 21 मार्च की रात 11:56 मिनट पर होगी। ऐसे में उदयातिथि के हिसाब से 21 मार्च 2026 को मत्स्य जयंती मनाई जा रही है। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 01:41 मिनट से शाम 04:07 मिनट तक है।
पूजन विधि
इस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करके व्रत का संकल्प लें। फिर गंगाजल से मंदिर को पवित्र करें और लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें। इसके बाद भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार का ध्यान करके पीले फूल, तुलसी और प्रसाद अर्पित करें। वहीं 'ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नम:' मंत्र का जाप करें। इस दिन गरीबों को दान दें और जरूरतमंदों की सहायता करें। वहीं संभव हो तो विष्णु सहस्त्रनाम स्त्रोत का पाठ करें।
महत्व
हिंदू मान्यताओं के मुताबिक जब पृथ्वी पर प्रलय आने वाली थी, तब भगवान विष्णु ने मत्स्य का रूप धारण किया था। इस अवतार के जरिए उन्होंने राजा सत्यव्रत को जीवन और सृष्टि के संरक्षण का मार्ग दिखाया था। इस दिन व्रत, पूजा और दान आदि करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का आगमन होता है।