हस्तरेखा शास्त्र के मुताबिक हथेली की रेखाएं व्यक्ति के जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण राज खोलती हैं। इन रेखाओं के जरिए संभावनाओं, संघर्षों और व्यक्ति की मानसिक स्थिति के बारे में पता किया जा सकती है। इन्हीं रेखाओं में एक विशेष और रहस्यमयी रेखा होती है। जिसको राहु रेखा कहा जाता है। हस्तरेखा शास्त्र में राहु रेखा को तनाव रेखा, चिंता रेखा या विघ्न रेखा भी कहा जाता है।
आमतौर पर राहु रेखा मंगल पर्वत से निकलकर भाग्य रेखा और जीवन रेखा को काटते हुए मस्तिष्क रेखा तक पहुंचती है। कई बार यह हृदय रेखा तक भी पहुंच जाती है। हथेली में 3-4 राहु रेखाएं पाई जाती हैं। इन राहु रेखाओं का स्पष्ट, गहरा और मोटा होना शुभ नहीं माना जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए आपको हथेली में मौजूद राहु रेखा के बारे में बताने जा रहे हैं।
जीवन रेखा काटने पर प्रभाव
अगर राहु रेखा जीवन रेखा को काटती है। तो पारिवारिक जीवन में अशांति और सेहत संबंधी परेशानियों के संकेत मिलते हैं। ऐसे लोगों को बार-बार मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है।
भाग्य रेखा पर प्रभाव
हस्तरेखा शास्त्र के मुताबिक अगर राहु रेखा भाग्य रेखा को काटती है, तो यह जीवनसाथी की सेहत में गिरावट, वैवाहिक जीवन में उतार-चढ़ाव या कार्यक्षेत्र में अस्थिरता का संकेत देती है।
मस्तिष्क रेखा को काटने पर प्रभाव
जब राहु रेखा मस्तिष्क रेखा प्रभावित करती है, तो यह गलत निर्णय, धन हानि और बीमारियों की तरफ इशारा करती है। ऐसे जातकों को सोच-समझकर फैसले लेने की सलाह दी जाती है।
हृदय रेखा को छूने पर प्रभाव
अगर राहु रेखा हृदय रेखा तक पहुंच जाती है या फिर उसको स्पर्श करती है। तो प्रेम संबंधों में दूरी, रिश्तों में टूटन और भावनात्मक तनाव बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है।
राहु रेखा का अधिक अशुभ परिणाम
अगर राहु रेखा मस्तिष्क और जीवन रेखा के बहुत पास से निकलती है। तो यह जीवन में उथल-पुथल, दुर्घटना, रोग और गंभीर संकटों की तरफ संकेत करती है। कई बार ऐसे जातक को राहु दोष की वजह से आकस्मिक दुर्घटना, चोरी या फिर दीर्घकालिक बीमारी का सामना करना पड़ सकता है।
मानसिक संतुलन पर प्रभाव
बता दें कि अगर मंगल पर्वत से दो राहु रेखाएं साथ निकलकर पास-पास जाते हुए शनि पर्वत के नीचे मस्तिष्क रेखा को छूती है। तो ऐसे जातक का मानसिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। हस्तरेखा के मुताबिक इस योग में जातक भ्रम, तनाव और अस्थिर सोच से ग्रस्त रह सकता है।