अगर किसी व्यक्ति के कर्म कमजोर हैं, तो शुभ परिणाम भी प्रभावित होगा। सिर्फ ज्योतिष गणनाएं जीवन का निर्धारण नहीं कर सकती हैं। ज्योतिष शास्त्र एक संकेत प्रणाली होती है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र और ग्रहदशा जातक की स्वतंत्र इच्छा को कंट्रोल नहीं करते हैं। अंतिम परिणाम कर्म पर निर्भर करता है और कर्म हमेशा व्यक्ति के अपने हाथों में रहता है। लेकिन अगर व्यक्ति लापरवाही करता है, तो जन्मकुंडली की भविष्यवाणी अनिश्चित और कमजोर हो जाती है।
हालांकि इस बात में कोई दोराय नहीं है कि अगर जन्मकुंडली में अच्छे योग होने के बाद भी अगर व्यक्ति में अनुशासन, प्रयास और योग्यता नहीं है, तो व्यक्ति को शुभ फल नहीं मिल पाते हैं, जिसकी वह अपेक्षा रखता है। वहीं जीवन में कुछ घटनाएं ग्रह-नक्षत्रों द्वारा निर्धारित होती हैं। वहीं कुछ जातक की योग्यता और कर्म आदि के द्वारा भी बनती और बिगड़ती हैं। लेकिन अगर ज्योतिष की सीमाओं का अवलोकन किया जाता है, तो जातक के कर्म कौशल, योग्यता और व्यवहार पर बनती और बिगड़ती है। ऐसी स्थिति में ज्योतिष की भविष्यवाणी अनिश्चित रहती है।
जब जातक अपने कौशल और योग्यता का उपयोग नहीं करता है, तो वह असफल रहता है। हालांकि किसी भी व्यक्ति की सफलता अनेक मानकों पर आश्रित होती है। जैसे व्यक्ति का कौशल, मेहनत, वातावरण, शिक्षा और उसको प्राप्त होने वाले अवसर आदि। लेकिन एक ज्योतिष को सटीक भविष्यवाणी करने के लिए व्यक्ति की जन्मपत्री की ग्रहदशा के साथ यह भी ध्यान रखना होता है कि उस व्यक्ति की शिक्षा, आसपास का वातावरण और वह कितनी मेहनत कर सकता है और उसमें क्या कौशल और योग्यता है। वहीं अगर ज्योतिष इन बातों को नजरअंदाज करके भविष्यवाणी करता है, तो उसकी भविष्यवाणी गलत होने की ज्यादा संभावनाएं होती हैं।
क्योंकि अगर ज्योतिष जातक की वास्तविक क्षमता और कर्म-कौशल का आकलन किए बगैर सिर्फ जन्मपत्री के ग्रहों के आधार पर भविष्यवाणी करता है, तो उसकी भविष्यवाणी गलत हो सकती है। इसलिए ग्रह स्थिति से भविष्यवाणी करते समय ज्योतिष को जितना ज्यादा हो सके, उतना जातक की क्षमता आदि का बाहरी अवलोकन करके भविष्यवाणी करनी चाहिए।